Thursday, August 13, 2020
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कोदे का आटा नहीं है किसी दवा से कम, प्रधानमंत्री ने भी किया जिक्र, पढ़िए

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कोदा या मडुआ कई अलग-अलग स्‍थानीय नामों से जाना जाता है। कोदे का वैज्ञानिक नाम इल्यूसीन कोराकाना है। बहुत ही सादा और उत्तराखंड का मुख्य अनाज है इसका दाना राइ के दाने की तरह होता है। पीसने पर हलके काले रंग का आटा होता है और उपयोग बिलकुल गेहूं के आटे की तरह होता है। गढ़वाली में इसका बाड़ी (हलवा) बहुत खास माना जाता है, इसकी रोटियां बहुत ही टेस्टी होती हैं और पोस्टिक तत्वों से भरपूर होती हैं।

आजकल कोदे का इस्तेमाल रोटी ही नहीं बल्कि केक, चॉकलेट, बिस्किटस और आर्युवेदिक दवा के रूप में भी किया जाने लगा है। कोदे की रोटी खाने से शरीर में आसानी से कैल्शियम, प्रोटीन, ट्रिपटोफैन, आयरन, मिथियोनिन, रेशे, लेशिथिन इत्यादि महत्वपूर्ण स्वास्थ्यवर्धक तत्वों की पूर्ति हो जाती है। यही वजह है कि हाल ही में पारम्परिक भोजन को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी भाषण में कोदा का नाम लिया था ।

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आज कोदे की मांग विदेशों में भी बढ़ गई है। उत्तराखंड में यह आजीविका का साधन बनने जा रहा है। इसकी रोटी लोगों के घरों में फिर से जगह बनाने लगी है। स्थानीय लोग और वैज्ञानिक संस्थाएँ कोदे को लेकर विभिन्न प्रयोग कर रहे हैं। देहरादून स्थित कटियार एकमात्र बेकरी है जहाँ मंडुवे के आटे से बनी डबल रोटी आपको मिल जाएगी। कटियार बेकरीवालों का कहना है कि मंडुवे के आटे से बनी डबल रोटी की माँग तेजी से बढ़ रही है और वे माँग के अनुरूप पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा कृषि विज्ञान केन्द्र रानीचौरी ने मंडुवे के आटे से बर्फी बनाने का सफल प्रयोग किया है।

केन्द्र से प्रशिक्षण लेकर शिक्षित बेरोजगार संदीप सकलानी और कुलदीप रावत ने कोदे की बर्फी को पिछली दीपावली के दौरान बाजार में उतारा है। औषधीय गुणों से भरपूर इस जैविक बर्फी की कीमत 400 रुपए प्रति किलो है जिसकी ऑनलाइन डिलीवरी हो रही है। कोदा जिन कारणों से फेमश हो रहा है उसके कुछ और कारण भी हैं आइये जानते हैं –

  • आज मोटापा घटाने के लिए डाईटिंग के दौरान कोदे के आटे का इस्तेमाल हो रहा है। फायदा हो रहा है।
  • कोदे में 80 प्रतिशत कैल्श्यिम की मात्रा पाई जाती है। यह हड्डियों में ऑस्टियोपोरोसिस होने से बचाने में सहायक है।
  • कोदा डायबिटीज पीड़ितों के लिए उत्तम अनाज माना गया है। यह रिच फाईबर युक्त और शुगर फ्री अनाज है।
  • कोदे में आयरन रिच मात्रा में मौजूद हैं। रक्तचाप बढ़ने पर नियंत्रण का काम करता हैं।
  • माताओं में दूध की कमी होने पर रोज कोदे की रोटी साग खाने से समस्या दूर हो जाती है।
  • कोदे की रोटी खाने से पेट की गैस कब्ज की समस्या कम करने में सहायक और पाचन शक्ति सुचारू करने में सहायक है। इसमें फाईटोएसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
  • कोदा जुकाम, सर्दी से होने वाले गले दर्द, गले में खरास को जल्दी ठीक करने में सहायक है।
  • कोदे की रोटी खाने से और रागी त्वचा को रिच पोषण प्रदान करने में सहायक है।
  • कोदा आपकी सुंदरता को भी चार चाँद लगाएगा, इसका फेस पैक, फेस मास्क त्वचा से दाग, धब्बे मिटाने में खास सहायक है।
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