वीरता पुरस्कार के लिए जाएगा भाई को गुलदार से बचानी वाली 11 वर्षीय राखी का नाम

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अपने छोटे भाई को तेंदुए के चंगुल से बचाने वाली बहादुर बेटी राखी का नाम राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए भेजा जा रहा है। पौड़ी के जिलाधिकारी ने राखी के साहस की सराहना करते हुए कहा कि राखी का नाम वीरता पुरस्कार के लिए भेजा जा रहा है। राखी के अदम्य साहस की देशभर में चर्चा है। तेंदुए द्वारा कई बार उसके भाई को दबोचने का प्रयास किया गया, उसने अपने भाई सीने से छुपा के रखा।

गुलदार के पंजे व दाँतों से उस पर कई वार किये लेकिन राखी ने हिम्मत नहीं हारी। आपको बता दें कि हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर हमारे देश के बहादुर बच्चों को ‘राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाता है। यह पुरस्कार 16 साल से कम उम्र के बच्चों को उनके साहस और अपने प्राणों की परवाह किए बगैर दूसरों की जान बचाने का हौसला रखने के लिए दिया जाता है।

उत्तराखंड में गुलदार से लड़ने वाले बच्चों को पहले भी वीरता पुरस्कार मिले हैं। हालांकि इस साल अफसरों की लापरवाही कि वीरों की भूमि के नाम से पहचाने जाने वाले उत्तराखंड में राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए एक भी बच्चा नहीं मिला। लेकिन अब राखी का नाम वीरता पुरस्कार के लिए जायेगा। क्योंकि 15 अक्टूबर तक नामांकन कराने का मौका है।

आपको बता दें कि बहादुरी के लिए उत्तराखंड के 11 बच्चों को अब तक पुरस्कृत किया जा चुका है। इनमें तीन बच्चों को मरणोपरांत यह पुरस्कार मिला। 2003 में टिहरी गढ़वाल के हरीश राणा, 2004 में हरिद्वार की माजदा, 2006 में अल्मोड़ा की पूजा कबडवाल, 2010 में देहरादून के प्रियांशु जोशी, इसी वर्ष श्रुती लोधी को मरणोपरांत, 2011 में रुद्रप्रयाग के कपिल नेगी को मरणोपरांत, 2014 में चमोली की मोनिका को मरणोपरांत, 2014 में देहरादून के लाभांशु, 2015 में टिहरी गढ़वाल के अर्जुन सिंह, 2016 में देहरादून के सुमित ममगाई और 2017 में टिहरी गढ़वाल के पंकज सेमवाल को यह पुरस्कार मिल चुका है।

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