Thursday, August 13, 2020
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उत्तराखंड के स्थानीय बाजार में भी मशरूम की जबरदस्त मांग, हजारों लोग करें खेती फिर भी नहीं होगी पूर्ति

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उत्तराखंड में पलायन रोकने के लिए मशरूम जबरदस्त आधार बन सकता है। हजारों युवा मशरूम की खेती से जुड़ चुके हैं वहीं कई युवा मशरूम उत्पादन को अपनी समृद्धि का आधार सकते हैं क्योंकि मशरूम की मांग इतनी ज्यादा है कि स्थानीय बाजार में भी आसानी से बिक जाती है। अगर हजारों युवा भी मशरूम की खेती करें तो फिर मशरूम की पूर्ती करना असंभव है। देहरादून, हल्द्वानी, कोटद्वार, अल्मोड़ा, बागेश्वर, उत्तरकाशी, रुद्रपुर, श्रीनगर गढ़वाल, गौचर, नैनीताल, चम्पावत जैसे छोटे शहरों में मशरूम कहीं दिखता ही नहीं है।

सब्जी मार्केट में मशरूम एक मिनट में ही बिक जाती है। जब हमारे आस-पास ही बाजार है तो हम उसे बेचने की फ़िक्र क्यों पालते हैं? एक बार उगा कर देखिए बाजार आपके पास दौड़ के चला आएगा। पंजाब और हरियाणा देश की आधा से ज्यादा मशरूम उगाते हैं। उत्तरी राज्यों में मशरूम उत्त्पादन अच्छा होता है, इसलिए उत्तराखंड का नाम भी अब मशरूम के अग्रणी उत्पादकों में शामिल हो सकता है। इसके लिए बेरोजगार युवाओं को आगे आने की आवश्यकता है।

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यह बिना खेत की खेती है और इसमें कम लागत में कई गुना आमदनी है। जो बेरोजगार युवाओं को स्वलंबी बना सकता है। आपको बता दें कि मशरूम की खेती में होने वाले फायदे को देखकर इन दिनों इसकी खेती में शहरी युवा भी खासी दिलचस्‍पी ले रहे हैं। यही कारण है कि आजकल नए-नए तरीकों से मशरूम की खेती हो रही है। आप भी इसकी खेती से जुड़कर अच्छी आमदनी बना सकते हैं।

कम लागत पर कई गुना आमदनी-

आपको 15 किलोग्राम मशरूम बनाने के लिए 10 किलोग्राम गेहूं के दानों की आवश्यकता होती है। यदि आप एक बार में 10 क्विंटल मशरूम उगा लेते हैं तो आपका कुल खर्च 40-50 हजार रुपए आएगा और उसकी कीमत करीब 2 लाख रूपये से अधिक होगी। इसके लिए आप पुराने घरों में रैक लगाकर इसे ज़माना होगा। उत्तराखंड में भूसा आसानी में कम कीमत पर आपको मिल सकता है।

10 ग्राम लगता है बीज-

सबसे पहले गेहूं को उबाला जाता है और इस पर मशरूम पाउडर डाला जाता है, जिससे मशरूम का बीज तैयार हो जाता है। इसे तीन महीने के लिए इस बीज को 10 किलोग्राम गेहूं के भूसे में 10 ग्राम बीज के हिसाब से रखा जाता है। 3 महीने बाद गेहूं के ये दाने मशरूम के रूम में अंकुरित होने शुरू हो जाते हैं। इसके बाद इन्हें 20 से 25 दिनों के लिए पॉलिथीन में डालकर 25 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान वाले कमरे में रखा जाता है। इसके बाद मशरूम बिकने के लिए तैयार होता है।

ओइस्टर मशरूम की देश में सबसे अधिक मांग है। ब्रांडेड स्टोर पर भी सबसे ज्यादा ओइस्टर मशरूम ही बिकता है। इस मशरूम के दाम कम से कम 150 से 200 रुपए प्रति किलोग्राम हैं। स्थानीय बाजार को आसानी से आप इनके इस्टाल लगा सकते हैं। यदि आप बेहतर मार्केटिंग कर किसी रिटेल स्टोर से करार कर सकते हैं तो दाम और भी बेहतर मिल सकते हैं। सालभर में दो बार इसे पैदा किया जा सकता है।

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